केंद्रीय दिल्ली में तनावपूर्ण नज़ारा: थाने के बाहर बैठे नेता प्रतिपक्ष

शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 की दोपहर दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर एक असामान्य दृश्य देखने को मिला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचव के साथ, थाने के बाहर सड़क पर धरने पर बैठ गए। मांग एक ही थी — 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। जब पुलिस ने कोई तत्काल एफआईआर या जांच अधिकारी (आई/ओ) की नियुक्ति की जानकारी देने से इनकार कर दिया, तो राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं ने मौके पर ही धरना शुरू कर दिया। कांग्रेस ने एक्स पर लिखा, 'कोई एफआईआर नहीं। कोई इंसाफ नहीं। इसलिए हम बैठे हैं।'

कौन हैं साहिल लोचव और क्या हुआ था 20 जुलाई को?

19 वर्षीय छात्र साहिल लोचव को 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए 'चलो संसद' मार्च के दौरान चेहरे और आंख में गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण उनकी दाहिनी आंख की रोशनी चली गई बताई जा रही है। यह प्रदर्शन प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रहे पेपर लीक के मुद्दे को लेकर आयोजित किया गया था। राहुल गांधी ने इससे पहले 24 जुलाई को साहिल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया, हालांकि सरकार ने इससे लगातार इनकार किया है। उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने अपनी चोटें भी दिखाई थीं और कहा था कि सरकार को झूठ बोलना बंद कर छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल को स्वीकार करना चाहिए।

तीन थानों का चक्कर, फिर भी एफआईआर नहीं

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, साहिल ने सबसे पहले 14 अगस्त को अपने वकीलों के साथ पुलिस से संपर्क कर एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि पुलिस ने कथित तौर पर न तो कोई आई/ओ नंबर दिया और न ही शिकायत की कोई पावती। इसके बाद 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए मामले को दोबारा उठाया गया, लेकिन तब भी कोई प्रगति नहीं हुई। शुक्रवार को राहुल गांधी खुद साहिल के साथ मैदान में उतरे। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी पहले मंदिर मार्ग थाने गए और वहां मामला दर्ज करने का अनुरोध किया, लेकिन पुलिस ने कथित तौर पर इनकार कर दिया। इसके बाद वे डीसीपी सेंट्रल से मिलने पहुंचे, और आखिरकार कनॉट प्लेस थाने होते हुए संसद मार्ग थाने के डीसीपी कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने अब तक की गई पुलिसिया कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी।

'यह देरी नहीं, न्याय से इनकार है'

डीसीपी कार्यालय में हुई बातचीत बेनतीजा रहने के बाद राहुल गांधी थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस ने एक्स पोस्ट में लिखा, 'आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पीड़ित के साथ डीसीपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे। डीसीपी अब भी न तो कोई जांच अधिकारी नियुक्त कर रहे हैं और न ही एफआईआर दर्ज कर रहे हैं। यह देरी नहीं है, यह न्याय से इनकार है। जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, हम यहां से नहीं हटेंगे।' सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने साफ कर दिया था कि जब तक मामला औपचारिक रूप से दर्ज नहीं होता, वे वहीं डटे रहेंगे।

अमित शाह पर सीधा निशाना

यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को सीधे निशाने पर लिया हो। 25 जुलाई को उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें छात्रों के खिलाफ हुई पुलिसिया कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था, 'हम इस हिंसा के लिए अमित शाह को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने हमारे छात्रों पर गोली चलाने की इजाजत दी। उन्होंने पैलेट गन सहित घातक हथियारों के इस्तेमाल को मंजूरी दी। हमारे लिए यह एक बुनियादी मुद्दा है। हम अपनी ही सुरक्षा एजेंसियों को भारत के भविष्य पर गोली चलाने की इजाजत नहीं दे सकते।' उन्होंने यह भी कहा था कि यह मुद्दा संसद में एक बड़ा विषय बनेगा।

दिल्ली पुलिस का पक्ष: 'बल प्रयोग हुआ, पर पैलेट गन नहीं'

जहां कांग्रेस और छात्र संगठनों का आरोप है कि रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया, वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि अनियंत्रित भीड़ को काबू में करने के लिए बल का प्रयोग किया गया, लेकिन आधिकारिक तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया गया है। पुलिस के अनुसार, पूरे मामले की जांच अभी जारी है। यही विरोधाभास इस पूरे विवाद के केंद्र में है — एक तरफ पीड़ित की आंख की रोशनी जाने का दावा, तो दूसरी तरफ प्रशासन का इनकार, और इन दोनों के बीच फंसी है वह एफआईआर, जो अब तक दर्ज ही नहीं हो पाई।

आगे क्या?

फिलहाल राहुल गांधी का धरना जारी है, और कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि जब तक औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं होती, यह प्रदर्शन नहीं रुकेगा। यह घटनाक्रम एक बार फिर उस बड़े राजनीतिक टकराव को हवा देता नज़र आ रहा है, जो जुलाई के अंत से ही जंतर-मंतर हिंसा को लेकर संसद और सड़क, दोनों जगह जारी है। अब सबकी नज़रें इस पर हैं कि दिल्ली पुलिस आखिरकार औपचारिक शिकायत दर्ज करती है या नहीं, और अगर नहीं करती, तो यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।