नई दिल्ली: आगामी त्योहारी सीजन (रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव और दिवाली) से ठीक पहले आम उपभोक्ताओं की रसोई के बजट पर महंगाई का असर दिखने लगा है। देशभर के प्रमुख खुदरा बाजारों में चीनी के खुदरा भाव ₹60 से बढ़कर ₹65 प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गए हैं। कीमतों में अचानक आए इस उछाल को देखते हुए केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने तत्काल प्रभाव से व्यापारियों और मिलों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कमोडिटी और बाजार की नियमित अपडेट के लिए बिजनेस व राष्ट्रीय समाचार पोर्टल पर बने रहें।

थोक व खुदरा बाजारों में कीमतों की वर्तमान स्थिति

उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र के प्रमुख बाजारों में जो चीनी एक माह पूर्व ₹45 से ₹48 प्रति किलोग्राम पर उपलब्ध थी, वह अब ₹62 से ₹65 प्रति किलो तक बिक रही है। उत्तर प्रदेश में एम-ग्रेड चीनी का एक्स-फैक्ट्री भाव ₹5,400 प्रति क्विंटल और थोक भाव ₹5,800 प्रति क्विंटल के आसपास दर्ज किया गया है। उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा जारी राष्ट्रीय औसत दैनिक भाव यद्यपि ₹52.30 प्रति किलो दर्शाया गया है, किंतु स्थानीय बाजारों में वास्तविक खुदरा दरें इससे अधिक बनी हुई हैं।

चीनी की कीमतों में वृद्धि के मुख्य कारण

बाजार विश्लेषकों ने कीमतों में आई तेजी के पीछे चार प्रमुख कारकों को रेखांकित किया है:

  • घटता क्लोजिंग स्टॉक: चालू पेराई सत्र में उत्पादन अनुमान से कम रहने के कारण 30 सितंबर तक देश का क्लोजिंग स्टॉक घटकर 30 से 33 लाख टन रहने का अनुमान है, जो सामान्य बफर मानक (60 लाख टन) से काफी कम है।
  • एथेनॉल सम्मिश्रण (E20 लक्ष्य): सरकार के 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य के तहत गन्ने के रस और शीरे का एक बड़ा हिस्सा जैव ईंधन उत्पादन में प्रयुक्त होने से शुद्ध चीनी आपूर्ति प्रभावित हुई है।
  • त्योहारी मांग में तेजी: मिष्ठान विक्रेताओं, कन्फेक्शनरी और एफएमसीजी उद्योग से थोक मांग में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • जमाखोरी व सट्टेबाजी: आपूर्ति सीमित होने की आशंका के बीच बिचौलियों द्वारा स्टॉक होल्डिंग की संभावना बढ़ गई है।

कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकारी कदम

बढ़ती दरों को रोकने के लिए सरकार ने थोक व्यापारियों और 10 मीट्रिक टन से अधिक खपत वाले बड़े उपयोगकर्ताओं के लिए स्टॉक रखने की समयसीमा को घटाकर 15 दिन कर दिया है। इसके अतिरिक्त, चीनी मिलों को अनिवार्य रूप से अपने दैनिक डिस्पैच, खरीदारों के जीएसटी विवरण और वास्तविक स्टॉक की जानकारी विभागीय पोर्टल पर अद्यतन करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थिति सामान्य न होने पर सरकार लगभग एक दशक बाद 100% आयात शुल्क को घटाकर शुल्क-मुक्त आयात (Duty-Free Import) की अनुमति देने पर भी विचार कर रही है।